लड़की… #A_Girl

बहुत समय से लड़कियों पर कुछ लिखना चाहती थी, लेकिन झिझकती रही, सोचती रही कि क्या लिखूं, विषय परेशान करने वाला है, खासकर एक लड़की के लिए। लड़कियों को लेकर अब तक कितनी ही स्याही उड़ेली जा चुकी है। लगता है कि अब कुछ भी नहीं रहा लिखने को लेकिन तभी ये ख्याल आता है कि नहीं कुछ तो है जो रह गया है अनकहा सा, अप्रकाशित अबूझ पहेली की तरह। लेकिन क्या?


मेरे ख्याल से अब तक लड़कियों के बारे में जो कुछ भी कहा गया वो उसके आंसुओं से जुड़ा हुआ था। लड़कियों की जिंदगी की माला में दर्द के मोती पिरो दिए गए। उसके वजूद को धुंधला कर दिया गया। मैं इन सबसे अलग आंसुओं की नहीं मुस्कुराहट की बात करना चाहती हूं।
..लड़की.. इस शब्द में कितनी खूबसूरती है। इसका अहसास तो सिर्फ ये होकर ही जाना जा सकता है। जिंदगी अगर लड़की के रूप में मिलती है तो दुनिया ही बदल जाती है। इसकी आंखें सोती कम हैं, छलकती ज्यादा हैं। हर वक्त सपनों से भरी रहती है। इसके दिल के अजीब हाल होते हैं, इसकी खुशियों के हिसाब निराले और जुड़ाव की मिसालें जुदा। जब कोई हौले से मुस्कुराता है। तो यह खिलखिला उठती है। इस अहसास में क्या छिपा है, बस यही जानती है। जब इसके अपने सोते हैं तो यह अपलक उन्हें देखती रहती है। इस नजर में दुआओं का कैसा आसमान तना है, ये तो एक लड़की ही बता सकती है। वह हाथ जो किसी के चेहरे का घेरा बनाता है उसमें पूरी कायनात समाई है। किसी रिश्ते को इतने विश्वास का आधार एक लड़की ही बना सकती है।


एक लड़की होने का अहसास ही खुद में सम्पूर्णता का भाव भर देता है। मेरा मानना है कि लड़़कियां गुलाब के फूल की तरह कोमल व नाजुक होती है, जो अपनी खुशबू व आकृष्टता से सभी को अपने सम्मोहन में बांध लेती है। लेकिन इसी के साथ इसमें वो कांटे भी मौजूद हैं जो इसे मसलने वाले हाथों को लहूलुहान भी कर सकते हैं। ये जिससे प्यार करती है उसके लिए खुद को भी न्यौछावर कर सकती है। अपनों की परवाह करना, अपनों की खुशी में खुश होना, खुद से ज्यादा अपनों के लिए दुआएं करना ये सभी कुछ केवल एक लड़की के बस की ही बात है। इसके लबों पर कभी किसी के लिए बद्दुआ नहीं होती।
बेगानों को भी अपना बनाने का जज्बा सिर्फ एक लड़की के दिल में हो सकता है, तभी तो जब शादी करके नये घर में जाती है तो हर रिश्ते को नये मायने देती है। सभी को अपने विश्वास के धागों में बांधती है। कोई भी इंसान चाहे कितनी भी प्रगति कर ले, न तो अकेला कामयाब हो सकता है और न ही सुखी। जिंदगी के सफर में हर मोड़ पर एक साथी की दरकार तो रहती ही है। अगर ऐसा ना हो तो जिंदगी अपना वजूद ही खो देगी। हो सकता है कि दुनिया की नजरों में लड़कियों की अहमियत कुछ ना हो लेकिन उसके किए हुए कामों की अहमियत जरूर है। उसकी परवाह किसी के लिए मायने रखती है। उसके अपने खुश हैं या नहीं दिन रात यही सोचती है। खुदा से खुद की खुशियों के रूप में अपनों के चेहरों पर मुस्कान मांगती है। जिस घर में बेटियां होती हैं उस घर के वातावरण में एक अलग ही नजाकत देखने को मिलती है।

उस घर की हवाओं में एक अलग ही खुशबू को महसूस भी किया जा सकता है। घर का जर्रा-जर्रा रोशन हो जाता है। लड़कियों से और बेजुबां दीवारें भी जिंदगी की खुशियों में शामिल हो जाती है। आज जरूरत है हमें अपने अस्तित्व की जमीन को और पुख्ता करने की। मुझे गर्व है अपने आप पर और अपने लड़की होने पर। मैं चाहती हूं कि हर लड़की अपना सम्मान करें तभी ये समाज भी आपका सम्मान करेगा एवं समाज से कन्या भ्रूण हत्या जैसा कलंकित शब्द मिट जाएगा।

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About jyoti jain

मैं हर सन्नाटे को पिघलाकर उन्हें शब्दों में गढ़ना चाहती हूँ ताकि जो कभी कहा नहीं वो भी सुनाई दें।
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