माँ <3

हम सभी की जिन्दगी में एक अनमोल रिश्ता होता है, एक ऐसा रिश्ता जिसका जब भी नाम लो एक निस्वार्थ मूरत ही आँखों के सामने तैरने लगती है । जो हर प्रेम की पराकाष्ठा होती है, जिसकी छवि इन्सान को अपने बिम्ब में भी दिखती है और प्रतिबिंम्ब में भी। वही जो हमारे लिये टुकड़ो-टुकड़ो में बंट कर भी पूरी-पूरी जुड़ जाती है। मेरी नजर में ऐसी शख्सियत सिर्फ़ “माँ” है। माँ सिर्फ़ माँ है, उनके जैसा कोई नहीं इस रिश्तों के खजाने में, और शायद इसिलिये वो माँ है और हम सभी सिर्फ़ इन्सान है जमाने में…  

image source google

दिल जो मेरा मन्दिर हो तो,

भगवान मेरी माँ तुम ही हो।

चुनर दुनिया ओढ़ा भी दे तो,

घर-बार मेरी माँ तुम ही हो।

काट-छाँट के रिश्तों में भी,

ताबीज मेरी माँ तुम ही हो।

सच कोई आखरी ख्वाहिश हो तो,

हर जनम मेरी माँ तुम ही हो।

‪#‎माँ_रूपी_ईश्वर_को_शत_शत_नमन‬… _/\_

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About jyoti jain

मैं हर सन्नाटे को पिघलाकर उन्हें शब्दों में गढ़ना चाहती हूँ ताकि जो कभी कहा नहीं वो भी सुनाई दें।
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2 Responses to माँ <3

  1. पढ़ने के बाद पूरी लंबी यात्रा से होकर आया हूँ , इस पोस्ट के बारे में क्या कहूँ कुछ समझ नहीं पा रहा हूँ
    लंबी यात्रा जो आया हूं थक गया हूं
    तो यात्रा के बारे में बता सकता हूँ बहुत ही उतार चढ़ाव भरी रही ये बेहतरीन यात्रा।
    मोहब्बत अगर आपसे कोई करे तो उम्मीद है आप समझेंगे उन्हें
    बस हमारी मोहब्बत को आपकी समझ की जरूरी है और आपको पढ़ते रहने की । कुछ ऐसी ही मोहब्बत सी हो गई है आपकी सादगी, शालीनता आपके लेखन से जो इतना कुछ सिखा जाती हैं जब भी आपकी संगत में आता हूं।
    शुभकानाएं आपको ।

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    • jyotionic says:

      बहुत शुक्रिया बृजेश… पढ़ने के लिए भी और उस यात्रा को जी आने के लिए भी जिसकी गहराई में सिर्फ अपनापन है। 💐

      Liked by 1 person

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