Monthly Archives: October 2016

कहीं ये आँखे बादल ना हो जाये…

तुम अगर अभी कुछ नहीं कर रहे हो तो एक काम करना, एक जगह बैठना जहाँ से खुला आसमाँ दिखता है। बैठकर देखना इन बादलों को रोते हुए… और देखना जमीं पर उनके आँसूओं का दरिया बनते हुए। जब बादलों … Continue reading

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बारिश…

मैंने बादलोँ को दूर कही; संदेशा भेजा था, घिर-घिर आने को; आसमाँ पे छाने को, धरती को ढाँक लेने को; तेरी सूरत गढ़ने को। ताकी मैं इन घने बादलों को… पर्वतों को चूमते देख सकूँ; जैसे मैं हर रोज देखती … Continue reading

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ख़ुदा के हवाले…

उस ख़ुदा से कहना कभी मेरी आँखों में आँखें डालकर मुझसे कह दे कि मेरी मुहब्बत झुठी थी। कह दे मुझसे कि मेरी मुहब्बत की किताब में वफ़ा के सफ़े कम थे। तेरे लिए हसरतें कम थी, तेरे लिए ख़्वाहिशें … Continue reading

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आस्था का पर्व नवरात्रि

आश्विन मास की शुक्ल प्रतिपदा से लेकर नवमी तक नवरात्रि का त्योहार, भक्ति भावना, उत्साह-उमंग आस्था से सराबोर दिन-रात नो दिन और नौ रातों से मिल कर बनी ये नवरात्रि त्योहार के प्रारम्भ में ही कलश स्थापना की जाती है … Continue reading

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