जीवन हो तुम…

क्या है नये साल के मायने… 

नवचेतना, नवमंत्रणा, नवप्राण है, नवयुक्तियाँ। जी हाँ, नया साल माने सब कुछ नया सा। कुछ पुराना नहीं। पुराना कुछ हमें रास भी तो नहीं। सबमें नवीनता पसन्द है हमें। साफ़-साफ़, सुथरा- सुथरा। इसिलिये शायद हर बार एक नया वर्ष आता है। वादों की सौगात लिये, मंजिलो की पतंग को उम्मीदों की डोर लगाये। हल्की ठण्डी में अपनों से ओढायी जाने वाली दुशालों की तरह। जिसमे गर्माहट है कुछ कसमों की, ठिठुरन है भविष्य की चिन्ता की। करने को भी तो कितने काम है नये साल मे। अपनो को खुश रखने के जतन करने है। खुद को हँसाने की वजह तलाशनी है। सपने जो देखे है आँखो ने सभी, उन सपनों को पलकों की छाँव में अंकुरित करना है। यहीं तो सिखाता है हर नया साल, की वक्त कभी रुकता नहीं। ये कभी थमता नहीं।

 

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इक रथ है ये जिन्दगी…
और तु उसका पहिया सा है।
तुझ पर ही टिका भविष्य है…
तुझ पर ही चला तेरा आज है।
रुको ना तुम, थको ना तम…
नये साल में नये प्रण धरों।
अटखेलियाँ कुछ नयी करो…
चिन्ताओं को कुछ विराम दो।
मंजिले कुछ नयी बुनो…
वर्ष जब नया सा है
तो सब कुछ नया तो हो।।

 

गुजरा साल अहम क्यों??

वक्त तो युहीं गुजरता रहा है, आगे भी गुजरता रहेगा। अगर हम वक्त से कुछ सीखे नहीं तो ये हमारी मुर्खता होगी। गुजरा हुआ हर पल अनुभावों का खजाना लिये रहता है।
“एक क्षण कोई छुटा नहीं,
जब दिल ने कुछ सिखा नहीं।“
हुनर बस हममें होना चाहिये जिन्दगी को गुजारने की बजाये जी भर के जी लेने का। तभी ये पल अहम कहलायेंगे, तभी ये पल याद बन पायेंगे। जब तक पलों को, वक्त को जीयेंगे नहीं तब तक यादों का खजाना कैसे भरेंगे। छोटी-छोटी खुशियों को सन्दूकों में भर कर देखो। वादों की पोटली को बड़ा बनाओ तो सही… फ़िर देखो गुजरा हुआ कल, मौजुद पल, और आने वाला कल हर बार चीख-चीख के कहेगा की तुम जीत गये। तुम विजेता हो जीवन के। क्योंकि तुमने जीया है जिन्दगी को, अपने हर एक पल को। और यदी एसा होगा तो हर गुजरा पल अहम बन जायेगा। तुम्हारा कल अहम बन जायेगा। बीता साल अहम बन जायेगा।

 

क्या बाकी रह गया गुजरे साल में-

ये साल भी बाकी के सालों की तरह बीत गया। किसी के लिये अहम था, किसी के लिये खाली-खाली सा, तो किसी के लिये घोर निराशा से भरा। लेकिन एक बात सबके मुख से सुनी की- ‘यार पता ही नहीं चला ये साल कहां बीत गया।‘ लगा जैसे अभी तो जनवरी में मकर संक्रांति मनाई थी, तिल के लड्डु खाये थे। लो फ़िर से जनवरी आ गयी कितना तेजी से बीतता है ना वक्त। सभी दौड़ रहे है भविष्य कि अंधी भागदौड़ में। ना अपने लिये वक्त है ना अपनो के लिये वक्त है। बहुतों को कहते सुना है, “यार वक्त ही नहीं मिलता” अगर यही कह कर जीना है तो एसे जिये भी क्या जीये। बस दौड़े जा रहे है, लेकिन इतना दौड़ने के बाद भी लगता है जैसे मंजिल अभी भी उतनी ही दुर है। तो क्या मंजिल भी दौड़ रही है हमारे साथ। या फ़िर हम जिन्दगी को ट्रेडमिल बना चुके है जिसमे दौड़ भी रहे है लेकिन अपनी जगह पर, कदम चल रहे है लेकिन कोई दुरी तय नहीं कर पा रहे है। एक भ्रमजाल सा बुन लिया है हमने अपने चारों तरफ़ और उसमें खुद ही उलझते जा रहे है सिर से पैर तक। बहुत से वादे है खुद से जो अधुरे है। ढ़ेर सारी खुशियॉ है जो खुद को देनी है। हजारों मुस्कुराहटों के पल है जो हमारे लबो पर जीने को आतुर है। कई स्वप्नों से आँखों का चौंधियाना बाकी है। कितना कुछ शेष है अभी, कितना कुछ बाकि है अभी, कितना सारा जीना है अभी।

 

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क्या उम्मीदें है नये साल से, क्यों है, और कैसे पूरा करें-

नये साल के स्वागत में तैयारियाँ होने लगी है। चौखटे सजने लगी है। शुभ का नाद होने लगा है। नव का वन्दन होने लगा है। मुबारक हो नया साल आने लगा है। उम्मीदे फ़िर से दस्तक देने लगी है। चाहत ये है की नया साल शुभ हो, जरुरत ये है कि जरुर हो ही हो। आँसू पलको तक पहुँचने से पहले ही दफ़न हो जाये। खुशी से झूमते हुए आँखे भींचकर किसी को गले से लगाये। अपनेपन का अहसास जगाना है, जीवन को सफ़ल बनाना है। कुछ सकल मूरते गढ़नी है। नख शीष सब संवारने है जिन्दगी के। क्योंकि ये हमारी जिन्दगी है। जिसे अमृत सा मीठा हम बनायेंगे। खुद को ताजपोशी के लिये तैयार करना है। कोई मन्त्र नहीं इसको करने का बस दृढ़ ईच्छा रखनी है। समय की तलवार की धार पर सम्भल कर कदम रखने होंगे। तभी संजीवनी बनेगा जीवन हमारा और जीवित करेगा कई सालों से दबे पड़े ख्वाबों को।

 

लड़की… #A_Girl

 

वादे जो खुद से करने है।

जीत कर कई तख्तों-ताज भी खुद अकेला रह जाता है इन्सान। एसी कोई भुल हम ना करे। जीवन को यूं व्यर्थ ना करें। आओ मिलकर अब तो ये प्रण करें कि जीयेंगे खुद के लिये। मशीनों मे हिसाब नहीं, यादों मे सजायेंगे खुशियों को। आसमां मे एक तारा अपने नाम का ढ़ुंढ़ेगे। ताकि जब सबकुछ हार भी जाये तो भी ये इत्मीनान रहेगा की ये तारा तो हमारा है, इससे भले ही पुरा नभ आलोकिक ना हो लेकिन वो हिस्सा तो रोशनमन्द है जहां ये तारा है। जहां तक इसका नूर है वहां तक तो अंधेरा नहीं। यहीं एक तारा तो हम भी है। दुनिया ना सही अपनी जिन्दगी तो रोशन हम जरुर करेंगे। बस एक ये प्रण करें।
अन्त में बस यहीं दुआ की आने वाला वर्ष सभी के लिये खुशियाँ लाये। प्रार्थना ये भी है की ईश्वर तुम उन चेहरों पर खुशियाँ देना जो बरसो से उदास है, जिनके होंठ मुस्कुरना भुल गये है। उन्हे मुस्कुराहटों की सौगात देना। हे नव वर्ष सबको नवजीवन देना।

-ज्योति सामोता

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About jyoti jain

मैं हर सन्नाटे को पिघलाकर उन्हें शब्दों में गढ़ना चाहती हूँ ताकि जो कभी कहा नहीं वो भी सुनाई दें।
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