Monthly Archives: August 2017

खुलेआम होता रक्तपात… दोषी कौन?

गोरखपुर हादसे से लापरवाही और निकृष्टता का जो शर्मनाक चेहरा उजागर हुआ उससे पूरा देश दहल गया। इतना भयावह हादसा जिसने सुना सन्न रह गया। खुलेआम होता ये रक्तपात और दोषी कोई नहीं? 30 बच्चों का रक्तपात, स्कूलों से लेकर सरकारी दफ्तर तक कोई नहीं? Continue reading

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वो एक अधूरे ख्वाब की मौत थी…

क्या इतने कालजयी शब्द लिख देने के बाद रूमी को मौत का खौफ नहीं रहा था? या उसने अपनी तड़प को खुद से एकाकार करवा कर कई सालों पहले ही एक अदृश्य मौत का वरण कर लिया था? कल रात एक ख्वाब देखा, बहुत अजीब सा… Continue reading

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रूह फिर जिन्दा होगी…

ज्योति जैन/ राजस्थान.   उस वक्त उसका जिस्म गर्म भट्टी की तरह तप रहा था। लाल झक्क आंखों से आंसू लावे की तरह बरस रहे थे। वो कभी उंगलियों को मुट्ठी की तरह कसकर भिंचती, कभी फिर छोड़ देती शिथिल। … Continue reading

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