रूह फिर जिन्दा होगी…

ज्योति जैन/ राजस्थान.  

उस वक्त उसका जिस्म गर्म भट्टी की तरह तप रहा था। लाल झक्क आंखों से आंसू लावे की तरह बरस रहे थे। वो कभी उंगलियों को मुट्ठी की तरह कसकर भिंचती, कभी फिर छोड़ देती शिथिल। सभी को लगा ये जिस्म का ताप है दवाओं से उतरेगा, मगर उसे पता था ये जिस्म का नहीं रूह का ताप है। ऐसा ताप जो दवाओं से नहीं उतरेगा। उसकी छुअन से उतरेगा।

मगर इस सच के इतर एक और सच था। वो भी सिर्फ उसे ही पता था कि ये छुअन उसके नसीब में है ही नहीं। उसके नसीब में इंतजार है, ऐसा इंतजार जो उसे ताउम्र करना है। वो किसे चुने इंतजार को या मौत को? मरना मुश्किल नहीं है उसके लिए मगर उसका दिल डरता तो इस बात से है कि अगर उसके मरने के बाद वो आया तो? क्या मुंह दिखाएगी उसे कि उसका प्रेम उसे इस ताप से लड़ने की हिम्मत भी नहीं दे पाया?

 

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उसने फैसला किया वो इंतजार करेगी, लेकिन इस बीच अगर वो मौत के सदके हो जाए तो ये तुम्हारा जिम्मा है कि उस आने वाले बादशाह को तुम ये याद दिलाओ कि वो उस मरी हुई लड़की का हाथ थाम ले, कभी ना छोड़ने के लिए कि क्या पता उसकी रूह इस छुअन से फिर जिन्दा हो जाए…

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About jyoti jain

मैं हर सन्नाटे को पिघलाकर उन्हें शब्दों में गढ़ना चाहती हूँ ताकि जो कभी कहा नहीं वो भी सुनाई दें।
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11 Responses to रूह फिर जिन्दा होगी…

  1. Preeti Pandey says:

    heart touching lines , So real , It is like i am reading not just words but a life ❤️

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  2. सौरभ खरे says:

    अच्छा लेख है

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  3. Hemant joshi says:

    Its really words of heart.

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  4. Rahul Saraswat says:

    Kabil lfzo’n m ek mashook ki tadap Ka bahut achcha haal bya’ kiya hai
    Tu chhoo bhi le agar
    Bezaan jism m Jaan aa Jayegi
    Wrna log toh yhi kahenge ki
    Mar Gaye hum
    Jism ke sath sath rooh bhi fanaah ho Jayegi

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  5. Dear Jyoti…

    Alfazon Ki kaarigar ho.. Jo bhi likhti ho..use bahut hi shaandaar shuruaat deti ho toh bada hi khubsurat anjaam bhi..
    Yun hi kalamkari krti raho…

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  6. ummm … don’t know but I would like to be true to myself … I somehow found it quite dull n flat.

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