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रावणों की बस्ती में आज जलेगा रावण

क्रोध का, अहंकार का, घृणा का, पाप का, लिप्सा का, लोलुपता का, भ्रम का, झूठ का… हजारों रावण तुम्हारे भीतर जनम ले रहे हैं और प्रत्येक साल तुम्हें पाप से ज्यादा पापी बना रहा हूं मैं, इक पुतला रावण तुम्हारे मन के रावण पर हंस रहा है। Continue reading

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