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रास्तों का सफर: A journey towards life… Part-1

स्कूल में जब साइंस पढाई जाती थी तो ये पढाया जाता था की उर्जा ना तो उत्पन्न की जा सकती है ना ही उसे नष्ट किया जा सकता है। उसे सिर्फ़ एक रूप से दूसरे रूप में रुपान्तरित किया जा सकता है। क्या दुआएँ भी ऐसी ही होती है? तुमसे मुझ तक, मुझसे तुम तक यूँ ही स्थानांतरित होती रहती है।
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